राजू वासवानी रायपुर 8/12/2024
2005 से पहले मेडिकल कॉलेज के छात्रों की बहुत ही बुरी दशा थी वह शारीरिक विज्ञान पढ़ तो रहे थे लेकिन उन्हें शरीर उपलब्ध नहीं था शरीर उपलब्ध से मतलब है कोई डेड बॉडी उपलब्ध नहीं थी जिससे वे ज्ञान प्राप्त कर सके 2005 के बाद प्रदेश स्तर की बहुत बड़ी संस्था जो सामाजिक क्षेत्र में कई मुकाम हासिल करती जा रही थी उन्होंने इस क्षेत्र के संदर्भ में सोचा और शव दान के अवधारणा को फलीभूत किया। इससे पहले विद्यार्थी पुतलो की डमी बनाकर शरीर विज्ञान की पढ़ाई करते थे लेकिन आज बढ़ते कदम संस्था के कारण उनके लिए एक नई आशा के द्वार खुले और लोगों ने इसकी अहमियत को समझकर शरीर दान देना स्वीकार किया। आज स्थिति यह है कि छत्तीसगढ़ के हर मेडिकल कॉलेज में छात्रों की प्रैक्टिकल हेतु शरीर उपलब्ध है।
