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सिंधी समाज हर्षोल्लास से मनाएगा तीजड़ी एवं थदड़ी पर्व
जगदलपुर (मनीष मूलचंदानी) – नगर के सिंधी समाज की महिलाएं आगामी 12 अगस्त (मंगलवार) को तीजड़ी पर्व और 15 अगस्त (शुक्रवार) को थदड़ी पर्व धूमधाम से मनाएंगी।
सिंधी पंचायत की पूजन प्रभारी चंद्रा देवी नवतानी ने बताया कि तीजड़ी, जिसे सिंधी तीज भी कहा जाता है, पति की लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि के लिए मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। महिलाएं इस दिन उपवास रखकर पूजा-अर्चना करती हैं और गुरुद्वारे में तीजड़ी की कथा सुनती हैं। पार्वती माता के अटूट समर्पण का प्रतीक यह पर्व बच्चों के सुख-स्वास्थ्य के लिए भी मनाया जाता है। तीजड़ी के दिन तीन मटकियों में बोए गए हरे मूंग, गेहूं और तिल की पूजा की जाती है।
महिला विंग अध्यक्षा लक्ष्मी नवतानी ने बताया कि तीजड़ी व थदड़ी की रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं, और यदि चंद्रमा न दिखे तो अगली सुबह पूजा के बाद व्रत तोड़ा जाता है। थदड़ी पर्व पर चूल्हा नहीं जलाया जाता और दाल पकवान, लोलो, कोकी, साई भाजी, मसाला करेला, तरियल भिंडी, बूंदी रायता, पूरी आदि ठंडे व्यंजनों का सेवन किया जाता है।
महिला विंग सचिव भारती लालवानी ने बताया कि थदड़ी, सिंधी माह सावन की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है, जो शीतला माता को समर्पित है। इस दिन एक दिन पहले बनाए भोजन का भोग माता को अर्पित किया जाता है, बहन-बेटियों को मायके बुलाया जाता है और रिश्तेदारों को व्यंजन भेजे जाते हैं। माना जाता है कि शीतला माता बीमारियों, विशेषकर चेचक, से रक्षा करती हैं।
यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि परिवार और समुदाय के मेलजोल का भी अवसर है, जो सिंधी संस्कृति और परंपरा को जीवंत बनाए रखता है।
