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10 अप्रैल सिंधी भाषा दिवस: सिंधी समाज की मूल लिपि देवनागरी है, अरबी लिपि है गुलामी का प्रतीक: विजय कुमार जयसिंघानी
“समाजजनो को हिंदी के साथ ही देवनागरी लिपि का प्रयोग करना चाहिए”
आज 10 अप्रैल सिंधी भाषा दिवस है, शहीद हेमू कालानी विचार मंच के संस्थापक विजय कुमार जयसिंघानी ने इसकी बधाई देते हुए कहा कि राजनैतिक, साहित्यिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सिंधी समाज के लिए आज ऐतिहासिक दिवस है। आज ही के दिन यानी 10 अप्रैल 1967 को भारत में सिंधी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया, जिसके बाद सिंधी भाषा को अन्य भारतीय भाषाओं की तरह दर्जा प्राप्त हो गया था। आज भारत के कई प्रमुख राज्यों में निवासरत सिंधी समाज के लोगों द्वारा मुख्य बोली तो है, किंतु समाज के लोग अपनी लिपि को लेकर आज भी दिग्भ्रमित हैं। क्योंकि समाजजनों द्वारा बहुत से अवसर पर अरबी लिपि का उपयोग किया जाता है, जबकि सिंधी समाज की मूल लिपि देवनागरी है, और अरबी लिपि गुलामी का प्रतीक है।
विजय कुमार जयसिंघानी ने बताया कि भारत के विभाजन के बाद सिंध प्रांत पाकिस्तान के हिस्से में चला गया, किंतु अखंड भारत की प्रमुख प्रादेशिक भाषा, बोली को अपने साथ लाए थे, और भारत में आने के बाद शरणार्थियों का दंश झेलने वाले सिंध के वासियों के मन मस्तिष्क में अपनी लिपि को लेकर हमेशा से ही संशय की स्थिति बनी रही है।
उन्होंने आगे बताया कि भारत के पश्चिमी हिस्से और मुख्य रूप से अविभाजित भारत के सिंध प्रान्त में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा थी एवं आज भी है। यह सिंधी हिंदू समुदाय(समाज) की मातृ-भाषा है। गुजरात के कच्छ जिले मे सिंधी भाषा को कच्छी भाषा कहते है, तथा कच्छ मे प्रमुख रूप से इसी भाषा उपयोग किया जाता है। इसका संबंध आर्य भाषा परिवार से है, जिसमें संस्कृत समेत हिन्दी, पंजाबी और गुजराती व अन्य भाषाएँ सम्मिलित हैं। अनेक मान्य विद्वानों के मतानुसार, आधुनिक भारतीय भाषाओं में सिन्धी बोली के रूप में संस्कृत के सर्वाधिक निकट है, सिन्धी के लगभग सत्तर प्रतिशत शब्द संस्कृत मूल के हैं, अथवा यह मान सकते हैं कि सिंधी नितांत संस्कृत मूल की भाषा है।
सिंधी भाषा सिंध प्रदेश की भारतीय-आर्य भाषा है, इससे विदित होता है कि सिंधी के मूल में आर्य तत्व पहले से ही विद्यमान है। यह बात उल्लेखनीय है कि इस्लामी शासनकाल में सिंध के मूल निवासियों का पठन व लेखन कार्य अरबी लिपि में परिवर्तित हो गया था। पाकिस्तान में सिंधी भाषा नस्तालिक (यानि अरबी लिपि) में लिखी जाती है, वहीं भारत में इसके लिये देवनागरी और अरबी लिपि दोनो प्रयोग किये जाते हैं। जबकि सिंधु भाषा की मूल लिपि देवनागरी ही है, और अरबी लिपि आक्रमणकारियों की गुलामी का प्रतीक है, इसलिए समाजजनो को हिंदी के साथ ही देवनागरी लिपि का ही अध्यन्न करने व पढ़ने के साथ ही लेखन के लिए प्रयोग करना चाहिए।
