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पूज्य शदाणी दरबार में आयोजित हुआ विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम
रोकी जा सकती थी लाखों लोगों की हत्याएं,विभाजन की त्रासदी में षडयंत्र की बू अब तक आती है:अमित चिमनानी
राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के तत्वाधान में पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में पूज्य संत डॉक्टर युधिष्ठिर लाल महाराज जी के नेतृत्व में विभाजन विभीषका स्मृति दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूज्य संत डॉक्टर युधिष्ठिर लाल महाराज ने कहा कि अपने इतिहास को याद रखना बेहद आवश्यक होता है एवं अपना इतिहास ना याद करने वाले लोगों का भविष्य बहुत सुनहरा नहीं होता ।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार करते हैं कि उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को मान्यता देकर ऐसे सभी लोगों के जख्मों को याद किया, जिन्हें इतिहास से मिटाने की भरपूर कोशिश की गई थी।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए समाज सेवी अमित चिमनानी ने कहा की विभाजन के समय हुआ घटनाक्रम केवल एक संयोग मात्र नहीं था लाखों लोगों की हत्याएं होती रही ,लेकिन उसे रोका नहीं गया क्यों?आखिर क्यों इस त्रासदी में आज भी षड्यंत्र की बू आती है? एक तरफ भारत की आजादी का जश्न था तो दूसरी तरफ भारत की ही बेटियों की आबरू को लूटा जा रहा था, लोगों के गले काटे जा रहे थे उनके पास जो थोड़ा सामान था उसे भी लूट लिया जा रहा था और यह भी इतिहास में सुनने को मिलता है कि जो लोग अधमरी हालत में अस्पताल पहुंचे थे उन्हें मौत का इंजेक्शन देकर मारा गया था।इतिहास आज भी इस त्रासदी के जिम्मेदारों को ढूंढ रहा है आखिर डेढ़ करोड़ लोगों के विस्थापन लगभग 20 लाख मौतों ,75 हजार महिलाओं के साथ हुए बलात्कार का जिम्मेदार है कौन? आखिर क्यों देश की युवा पीढ़ी से यह सभी तथ्य छुपाने का प्रयास हुआ।
अमित ने कहा कि युवा पीढ़ी यह जानती है कि भारत की आजादी के लिए कई आंदोलन किए गए लेकिन 1919 में जो खिलाफत आंदोलन हुआ वह क्यों हुआ था? आखिर भारत से 5 हजार किलोमीटर की दूरी पर स्थित तुर्की के खलीफा के बदले जाने से यहां के लोगों को क्या आपत्ति थी यहां उसका आंदोलन क्यों होने दिया गया, इस आंदोलन को आगे क्यों बढ़ाया गया? ऐसे कई प्रश्न आज भी बने हुए हैं। जिस प्रकार हम वर्षों से अन्य लोगों के इतिहास के बारे में जान रहे वैसे ही हमें अपने इतिहास से भी परिचित होना चाहिए ।इतिहास त्रासदी पूर्ण जरूर है, दुखदाई है ,पीड़ा देने वाला है मगर युवा पीढ़ी को यह मालूम होना चाहिए कि आखिर 14 अगस्त 1947 को क्या हुआ था क्यों हुआ था।
कार्यक्रम में वक्ता के रूप में भारतीय सिंधु सभा के प्रदेश के अध्यक्ष श्री लधाराम नैननवानी ,पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के अध्यक्ष श्री महेश दरयानी, श्री दर्शन निहाल श्री अमर गिदवानी, श्रीमती हेमलता गावड़ा सहित बुद्ध जीवियों ने अपने विचार रखें एवं इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारीगण समाजसेवी श्री उदय शदाणी प्रहलाद शादीजा,मुरली शादिजा अमर चंदानी नंदलाल साहित्य श्री बंटी गांवडा ,महेश मोटलानी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
स्मृति दिवस कार्यक्रम
रोकी जा सकती थी लाखों लोगों की हत्याएं,विभाजन की त्रासदी में षडयंत्र की बू अब तक आती है:अमित चिमनानी
राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के तत्वाधान में पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ में पूज्य संत डॉक्टर युधिष्ठिर लाल महाराज जी के नेतृत्व में विभाजन विभीषका स्मृति दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूज्य संत डॉक्टर युधिष्ठिर लाल महाराज ने कहा कि अपने इतिहास को याद रखना बेहद आवश्यक होता है एवं अपना इतिहास ना याद करने वाले लोगों का भविष्य बहुत सुनहरा नहीं होता ।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार करते हैं कि उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को मान्यता देकर ऐसे सभी लोगों के जख्मों को याद किया, जिन्हें इतिहास से मिटाने की भरपूर कोशिश की गई थी।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए समाज सेवी अमित चिमनानी ने कहा की विभाजन के समय हुआ घटनाक्रम केवल एक संयोग मात्र नहीं था लाखों लोगों की हत्याएं होती रही ,लेकिन उसे रोका नहीं गया क्यों?आखिर क्यों इस त्रासदी में आज भी षड्यंत्र की बू आती है? एक तरफ भारत की आजादी का जश्न था तो दूसरी तरफ भारत की ही बेटियों की आबरू को लूटा जा रहा था, लोगों के गले काटे जा रहे थे उनके पास जो थोड़ा सामान था उसे भी लूट लिया जा रहा था और यह भी इतिहास में सुनने को मिलता है कि जो लोग अधमरी हालत में अस्पताल पहुंचे थे उन्हें मौत का इंजेक्शन देकर मारा गया था।इतिहास आज भी इस त्रासदी के जिम्मेदारों को ढूंढ रहा है आखिर डेढ़ करोड़ लोगों के विस्थापन लगभग 20 लाख मौतों ,75 हजार महिलाओं के साथ हुए बलात्कार का जिम्मेदार है कौन? आखिर क्यों देश की युवा पीढ़ी से यह सभी तथ्य छुपाने का प्रयास हुआ।
अमित ने कहा कि युवा पीढ़ी यह जानती है कि भारत की आजादी के लिए कई आंदोलन किए गए लेकिन 1919 में जो खिलाफत आंदोलन हुआ वह क्यों हुआ था? आखिर भारत से 5 हजार किलोमीटर की दूरी पर स्थित तुर्की के खलीफा के बदले जाने से यहां के लोगों को क्या आपत्ति थी यहां उसका आंदोलन क्यों होने दिया गया, इस आंदोलन को आगे क्यों बढ़ाया गया? ऐसे कई प्रश्न आज भी बने हुए हैं। जिस प्रकार हम वर्षों से अन्य लोगों के इतिहास के बारे में जान रहे वैसे ही हमें अपने इतिहास से भी परिचित होना चाहिए ।इतिहास त्रासदी पूर्ण जरूर है, दुखदाई है ,पीड़ा देने वाला है मगर युवा पीढ़ी को यह मालूम होना चाहिए कि आखिर 14 अगस्त 1947 को क्या हुआ था क्यों हुआ था।
कार्यक्रम में वक्ता के रूप में भारतीय सिंधु सभा के प्रदेश के अध्यक्ष श्री लधाराम नैननवानी ,पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के अध्यक्ष श्री महेश दरयानी, श्री दर्शन निहाल श्री अमर गिदवानी, श्रीमती हेमलता गावड़ा सहित बुद्ध जीवियों ने अपने विचार रखें एवं इस कार्यक्रम में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारीगण समाजसेवी श्री उदय शदाणी प्रहलाद शादीजा,मुरली शादिजा अमर चंदानी नंदलाल साहित्य श्री बंटी गांवडा ,महेश मोटलानी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
