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रक्षाबंधन – रिश्तों की मिठास और विश्वास का संगम, जैसे स्नेहिल PARQH परिवार – सोनू व जीतू नागदेव
रक्षाबंधन – प्रेम, विश्वास और रक्षा का पावन बंधन
रक्षाबंधन का पर्व भारतीय संस्कृति का एक ऐसा अनमोल उत्सव है, जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, सुरक्षा के वचन और स्नेह की मिठास का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी जड़ें केवल एक पारिवारिक रस्म में नहीं, बल्कि पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक घटनाओं और सामाजिक परंपराओं में गहराई से जुड़ी हैं?
माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा
पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि मांगी। वचन के अनुसार, बलि ने अपना सब कुछ दान कर दिया और विष्णु जी को पाताल लोक में अपने साथ रहने का आग्रह किया।
विष्णु जी के वहां रहने से चिंतित माता लक्ष्मी एक ब्राह्मण स्त्री का रूप धारण कर बलि के पास पहुँचीं और उन्हें राखी बांध दी। बलि ने बहन मानकर उपहार में वह वर मांगा जो वह चाहें। लक्ष्मी जी ने विष्णु जी को अपने साथ ले जाने का वर मांगा और बलि ने वचन निभाया। यही परंपरा आगे चलकर राखी के बदले उपहार देने में बदल गई।
रक्षाबंधन केवल बहन और भाई का पर्व नहीं,
बल्कि यह किसी भी रिश्ते में सुरक्षा, विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। चाहे वह मित्रता हो, गुरु-शिष्य का संबंध हो या किसी अजनबी के साथ विश्वास का बंधन — राखी उस रिश्ते में सुरक्षा और स्नेह का संकल्प भर देती है।
इसलिए आज भी बहन जब भाई के घर राखी बांधने जाती है, तो भाई उसकी रक्षा का वचन देता है और उपहार देकर इस रिश्ते को संजोता है — जैसे राजा बलि ने माता लक्ष्मी को दिया था।
