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स्वामी हरिगिर महराज का 57वां वर्सी महोत्सव आज 7 अगस्त से शुरू
रायपुर।6/अगस्त/2025 – शताब्दी नगर, तेलीबांधा स्थित जय शक्ति धाम धर्मशाला में परम पूज्य स्वामी हरिगिर महराज का 57वां वर्सी महोत्सव आज 7 अगस्त से प्रारंभ हो रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन साईं आनंदगिर महराज व बाबा झंगलदास वाधवा परिवार के सान्निध्य में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ सम्पन्न होगा।
इस वर्सी महोत्सव में देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। खास तौर पर संत युधिष्ठिर लाल जी (शदाणी दरबार) एवं साईं लाल दास जी (झूलेलाल मंदिर, चकरभाठा) की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
पहला दिन – 7 अगस्त (गुरुवार)
प्रातः 9:00 बजे – दुर्गा माता पाठ प्रातः 11:00 बजे – अखंड पाठ साहेब (अम्मा मीरा देवी दरबार के सान्निध्य में)
दोपहर 1:00 बजे – ब्राह्मण भोज दोपहर 2:00 बजे भंडारा
शाम 4:00 बजे – अनाज वितरण (बाबा झंगलदास वाधवा परिवार द्वारा)
रात्रि 7:00 बजे – दुर्गा माता मंदिर में आरती
रात्रि 7:30 बजे – पाठ साहेब आरती एवं कीर्तन (भाई गोविंद सिंह)
रात्रि 9:00 बजे – एसएसडी महिला मंडल द्वारा कार्यक्रम
रात्रि 10:00 बजे – भजन एवं प्रवचन संध्या (साईं लाल दास जी, चकरभाँटा)
दूसरा दिन – 8 अगस्त (शुक्रवार)
प्रातः 8:30 बजे – दुर्गा माता मंदिर में आरती प्रातः 9:00 बजे – पाठ साहेब आरती दोपहर 1:00 बजे – भंडारा शाम 7:00 बजे – आरती रात्रि 7:30 बजे – कीर्तन (भाई गोविंद सिंह) रात्रि 9:00 बजे – प्रवचन (प्रजापिता ब्रह्माकुमारी दीदी) रात्रि 10:00 बजे – भजन संध्या (श्री मयूर अलवानी, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार)
तीसरा दिन – 9 अगस्त (शनिवार – रक्षाबंधन)
प्रातः 8:30 बजे – दुर्गा माता मंदिर में आरती प्रातः 9:00 बजे – दुर्गा माता पाठ समापन व हवन प्रातः 10:00 बजे – शोभायात्रा (तेलीबांधा से समाधि साहेब तक)प्रातः 11:00 बजे – समाधि साहेब पूजा-अर्चना व मुंडन संस्कार दोपहर 12:00 बजे – अखंड पाठ भोग साहेब (साईं युधिष्ठिर लाल जी, शदाणी दरबार के सान्निध्य में)
जय शक्ति धाम समिति के कोषाध्यक्ष सीए चेतन तारवानी ने बताया कि वर्सी महोत्सव में कल्याण, मुंबई, बड़ौदा, अहमदाबाद, नागपुर, दिल्ली, ग्वालियर समेत अनेक शहरों से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। सभी के लिए आवास, भोजन एवं परिवहन की पूरी व्यवस्था की गई है।
समिति अध्यक्ष मोहन लाल तेजवानी व टीम पूरे आयोजन की तैयारियों में जुटी हुई है।
स्वामी हरिगिर महराज का जीवन परिचय
स्वामी हरिगिर महाराज ने 1930 में सांसारिक मोह त्यागकर सन्यास धारण किया। उन्होंने पंजाब के माता उपासक श्री शिवगिरी महाराज से दीक्षा प्राप्त की और भारत के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करते हुए माता की भक्ति और आयुर्वेदिक सेवा कार्य किए।
1954 में रायपुर आकर छोटी कुटिया में रहकर जनसेवा शुरू की और कई असाध्य रोगों से लोगों को मुक्त किया।
1968 में रक्षाबंधन के दिन वे ब्रह्मलीन हुए। उनकी समाधि स्थल पर आज भी श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा है।
उनके उत्तराधिकारी बाबा झंगलदास वाधवा ने उनके बताए मार्ग पर चलते हुए वर्षों तक वर्सी महोत्सव मनाया। आज यह परंपरा उनके पुत्र व वर्तमान पीठाधीश साईं रामचंद वाधवा द्वारा जारी है।
संपर्क:चेतन तारवानी मो. 98261-22115
